रेलवे एनटीपीसी (क्लर्क, स्टेशन मास्टर)
NTPC का मतलब नॉन-टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरीज़ (Non-Technical Popular Categories) है: रेलवे में दफ़्तर और स्टेशन की नौकरियां। अंडरग्रेजुएट (12th पास) पदों में जूनियर क्लर्क, अकाउंट्स क्लर्क, ट्रेन क्लर्क और कमर्शियल-कम-टिकट क्लर्क शामिल हैं। ग्रेजुएट पदों में स्टेशन मास्टर, गुड्स ट्रेन मैनेजर, सीनियर क्लर्क और टिकट सुपरवाइजर शामिल हैं।
अंडरग्रेजुएट पदों के लिए: 12th पास। ग्रेजुएट पदों के लिए: कोई भी डिग्री।
सामान्य नियम के अनुसार अंडरग्रेजुएट पदों के लिए 18-30 वर्ष और ग्रेजुएट पदों के लिए 18-33 वर्ष; हाल के चक्रों में अतिरिक्त वर्ष दिए गए थे, इसलिए वर्तमान CEN को पढ़ें। OBC-NCL को +3 वर्ष, SC/ST को +5 वर्ष की छूट मिलती है। Official notice देखें
टाइपिस्ट पदों के लिए English या Hindi में टाइपिंग आना ज़रूरी है। स्टेशन मास्टर और ट्रेन मैनेजर पदों के लिए आंखों की रोशनी के कड़े मानक होते हैं।
चयन कैसे होता है
- RRB portal पर online आवेदन
- CBT 1 (स्क्रीनिंग)
- CBT 2
- टाइपिंग स्किल टेस्ट या कंप्यूटर-आधारित एप्टीट्यूड टेस्ट (केवल उन पदों के लिए जिनमें इसकी आवश्यकता है)
- दस्तावेज़ सत्यापन (Document verification)
- चिकित्सा परीक्षण (Medical examination)
वेतन
7वें CPC मैट्रिक्स के अनुसार अंडरग्रेजुएट पद लेवल 2 और लेवल 3 के हैं; ग्रेजुएट पद लेवल 5 और लेवल 6 के हैं। ↗Apply कैसे करें
rrbapply.gov.in पर जाएं, किसी एक RRB को चुनें; ग्रेजुएट और अंडरग्रेजुएट पदों के लिए अलग-अलग सूचनाएं आती हैं।तैयारी कैसे करें
- गणित और रीजनिंग से कट-ऑफ तय होता है; टाइमर लगाकर रोज़ अभ्यास करें।
- सामान्य जागरूकता में रेलवे, समसामयिक मामले (current affairs), इतिहास, भूगोल और राजनीति शामिल हैं।
- यदि आप क्लर्क पदों को लक्ष्य बना रहे हैं, तो टाइपिंग का अभ्यास जल्दी शुरू करें (इस टेस्ट में कंप्यूटर कीबोर्ड का उपयोग होता है)।
- स्टेशन मास्टर एप्टीट्यूड टेस्ट (CBAT) में कोई नकारात्मक अंकन (negative marking) नहीं होता है, लेकिन प्रत्येक भाग में न्यूनतम टी-स्कोर (T-score) लाना होता है; नमूना एप्टीट्यूड टेस्ट का अभ्यास करें।
लोग क्या गलती करते हैं
- पदों की प्राथमिकता (preference) लापरवाही से भरना; आपकी प्राथमिकता का क्रम ही आपका अंतिम पद तय करता है।
- पसंदीदा पद के चिकित्सा मानक (medical standard) की अनदेखी करना।
- दो अलग-अलग RRB में आवेदन करना।